Apani Class provides Bihar Board Class 10 Notes, Model Paper 2026, Objective Questions, Question Answer and exam preparation material in Hindi.

10.12.25

Class 10 Science: कार्बन एवं उसके यौगिक – Carbon and Its Compounds Notes, Summary, Important Questions

Class 10 Science Carbon and Its Compounds thumbnail showing central carbon atom with covalent bonds, methane, ethanol, acetic acid, diamond and graphite structures, with Hindi title ‘कार्बन एवं उसके यौगिक
अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक - कक्षा 10 विज्ञान सम्पूर्ण नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न और परीक्षा तैयारी

अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक - जीवन का आधार

क्यों पढ़ें यह अध्याय?

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है? कार्बन हमारे चारों ओर की दुनिया और हमारे शरीर का मूलभूत निर्माण खंड है। भोजन, कपड़े, दवाइयाँ, प्लास्टिक, ईंधन - ये सभी कार्बन यौगिकों से बने हैं। इस अध्याय को समझना आपको रसायन विज्ञान की दुनिया में एक मजबूत आधार देगा।

परीक्षा में इसका महत्व: यह अध्याय CBSE और अन्य बोर्ड परीक्षाओं में 5-7 अंकों के प्रश्न ला सकता है। इससे वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), 2 अंकों के लघु-उत्तरीय प्रश्न (जैसे संरचना बनाना, अंतर बताना) और 3-5 अंकों के दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न (जैसे रासायनिक अभिक्रियाएँ, समजातीय श्रेणी का चित्रण) पूछे जाते हैं।

छात्र इसे क्यों पढ़ें? क्योंकि यह अध्याय न केवल आपकी परीक्षा में अच्छे अंक दिलाएगा, बल्कि आपको अपने दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली चीजों; जैसे साबुन, डिटर्जेंट, शराब, सिरके आदि के काम करने का तरीका भी समझाएगा। यह अध्याय रसायन विज्ञान को वास्तविक जीवन से जोड़ता है।

अध्याय परिचय: एक नजर में

अध्याय का नाम एवं अर्थ: "कार्बन एवं उसके यौगिक" - इस अध्याय में हम कार्बन नामक एक ऐसे अद्भुत तत्व और उसके द्वारा बनाए गए लाखों यौगिकों का अध्ययन करते हैं।

सरल परिभाषा: कार्बन एक अधातु तत्व है जिसकी परमाणु संख्या 6 है और यह अपनी चतु:संयोजकता (4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन) और शृंखलन (दूसरे कार्बन परमाणुओं से लंबी श्रृंखला बनाने की क्षमता) के गुणों के कारण अनगिनत यौगिक बनाता है।

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?

  • कार्बन में सहसंयोजी आबंध क्यों और कैसे बनते हैं?
  • हाइड्रोकार्बन क्या होते हैं? संतृप्त और असंतृप्त यौगिकों में अंतर।
  • कार्बन यौगिकों के नाम कैसे रखे जाते हैं? (नामपद्धति)
  • समजातीय श्रेणी क्या है?
  • कार्बन यौगिकों की महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ - दहन, ऑक्सीकरण, संकलन, प्रतिस्थापन।
  • एथनॉल और एथेनॉइक अम्ल (सिरका) के गुण व उपयोग।
  • साबुन और डिटर्जेंट कैसे सफाई करते हैं?

विस्तृत अध्ययन: सम्पूर्ण व्याख्या

4.1 कार्बन में आबंधन – सहसंयोजी आबंध (Covalent Bonding)

परिभाषा: सहसंयोजी आबंध दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के एक युग्म की साझेदारी से बनता है। यह आबंध दोनों परमाणुओं को उत्कृष्ट गैस विन्यास (अष्टक) प्राप्त करने में मदद करता है।

विस्तृत स्पष्टीकरण: कार्बन (परमाणु क्रमांक 6) के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसे अष्टक पूरा करने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने या खोने की आवश्यकता है। लेकिन C4- या C4+ बनाना बहुत मुश्किल है। इसलिए कार्बन साझेदारी का रास्ता अपनाता है।

उदाहरण 1 (मेथेन, CH4): एक कार्बन परमाणु, हाइड्रोजन के चार परमाणुओं के साथ अपने चारों इलेक्ट्रॉन साझा करता है। प्रत्येक हाइड्रोजन अपना एक इलेक्ट्रॉन साझा करता है। इस प्रकार कार्बन और प्रत्येक हाइड्रोजन के बीच एक सहसंयोजी आबंध बनता है।
उदाहरण 2 (परीक्षा प्रारूप पर आधारित):

प्रश्न: कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाइए।

हल: कार्बन (C) के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं। ऑक्सीजन (O) के बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं। कार्बन दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ दोहरे आबंध (प्रत्येक में दो इलेक्ट्रॉन युग्मों की साझेदारी) बनाता है। संरचना O::C::O होगी, जहाँ प्रत्येक ऑक्सीजन के दो एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म भी होंगे। इस प्रकार कार्बन और प्रत्येक ऑक्सीजन का अष्टक पूरा हो जाता है।

सहसंयोजी यौगिकों के गुण: इनके गलनांक व क्वथनांक कम होते हैं, ये जल में अघुलनशील पर कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं, और ये विद्युत के कुचालक होते हैं (ग्रेफाइट को छोड़कर)।

4.2 कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति

कार्बन लाखों यौगिक बनाता है। इसके दो मुख्य कारण हैं:

  1. शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं की स्वयं के साथ लंबी श्रृंखलाएँ (सीधी, शाखित, चक्रीय) बनाने की अद्वितीय क्षमता। कार्बन-कार्बन आबंध अत्यधिक प्रबल होता है।
    • संतृप्त यौगिक: केवल एकल आबंध वाले (जैसे - एल्केन)।
    • असंतृप्त यौगिक: द्वि- या त्रि-आबंध वाले (जैसे - एल्कीन, एल्काइन)।
  2. चतु:संयोजकता (Tetravalency): कार्बन के चार संयोजकता इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हैलोजन आदि चार अन्य परमाणुओं के साथ आबंध बना सकता है।
हाइड्रोकार्बन: केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने यौगिक।
हाइड्रोकार्बन के प्रकार
प्रकारआबंधसामान्य सूत्रउदाहरण
एल्केनसभी एकल आबंधCnH2n+2मेथेन (CH4), एथेन (C2H6)
एल्कीनकम से कम एक द्वि-आबंधCnH2nएथीन/ईथीन (C2H4)
एल्काइनकम से कम एक त्रि-आबंधCnH2n-2एथाइन/ऐसीटिलीन (C2H2)

संरचनात्मक समावयवता: समान आणविक सूत्र लेकिन भिन्न संरचना वाले यौगिक। जैसे - ब्यूटेन (C4H10) के दो समावयव हैं - n-ब्यूटेन (सीधी श्रृंखला) और आइसोब्यूटेन (शाखित श्रृंखला)।

4.2.3 प्रकार्यात्मक समूह (Functional Groups)

परिभाषा: वह परमाणु या परमाणुओं का समूह जो किसी कार्बन यौगिक को उसका विशिष्ट रासायनिक गुण प्रदान करता है। यह हाइड्रोकार्बन श्रृंखला में हाइड्रोजन को प्रतिस्थापित करता है।

महत्वपूर्ण प्रकार्यात्मक समूह
समूह का नामसूत्र (प्रतिरूप)यौगिक का प्रकारउदाहरण
हैलोजन (क्लोरो)-Clहैलोएल्केनक्लोरोमेथेन (CH3Cl)
ऐल्कोहॉल-OHऐल्कोहॉलएथनॉल (C2H5OH)
ऐल्डिहाइड-CHOऐल्डिहाइडएथेनल (CH3CHO)
कीटोन>C=Oकीटोनप्रोपेनोन (CH3COCH3)
कार्बोक्सिलिक अम्ल-COOHकार्बोक्सिलिक अम्लएथेनॉइक अम्ल (CH3COOH)

4.2.4 समजातीय श्रेणी (Homologous Series)

परिभाषा: ऐसे यौगिकों की श्रेणी जिसमें सदस्य एक ही प्रकार्यात्मक समूह रखते हों, एक सामान्य सूत्र द्वारा प्रदर्शित किए जाते हों और जिनके भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता हो, लेकिन रासायनिक गुण समान हों।

विशेषताएँ:

  • प्रत्येक अगले सदस्य में -CH2- का अंतर होता है।
  • आणविक द्रव्यमान बढ़ने पर गलनांक व क्वथनांक बढ़ता है।
  • रासायनिक गुण समान होते हैं।

उदाहरण: ऐल्कोहॉलों की समजातीय श्रेणी: CH3OH (मेथेनॉल), C2H5OH (एथनॉल), C3H7OH (प्रोपेनॉल)।

4.3 कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म

1. दहन (Combustion):

पूर्ण दहन पर कार्बन यौगिक CO2, H2O, ऊष्मा और प्रकाश देते हैं।
उदाहरण: CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O + ऊष्मा
ज्वाला की प्रकृति: संतृप्त हाइड्रोकार्बन → स्वच्छ नीली ज्वाला। असंतृप्त हाइड्रोकार्बन → पीली कज्जली (धुआँ वाली) ज्वाला।

2. ऑक्सीकरण (Oxidation):

ऑक्सीकारकों (जैसे KMnO4 या K2Cr2O7) की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल, कार्बोक्सिलिक अम्ल में बदल सकते हैं।
उदाहरण: CH3CH2OH (एथनॉल) [O] → CH3COOH (एथेनॉइक अम्ल)

3. संकलन अभिक्रिया (Addition Reaction):

परिभाषा: असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन, एल्काइन) हाइड्रोजन, हैलोजन आदि जोड़कर संतृप्त यौगिक बनाते हैं। उत्प्रेरक (Ni, Pd, Pt) की आवश्यकता होती है।
उदाहरण (हाइड्रोजनीकरण): CH2=CH2 (एथीन) + H2 → CH3-CH3 (एथेन)
वास्तविक जीवन में उपयोग: वनस्पति तेलों (असंतृप्त) को वनस्पति घी (संतृप्त) में बदलने के लिए।

4. प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction):

परिभाषा: संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) में एक परमाणु या समूह का दूसरे से प्रतिस्थापन।
उदाहरण (क्लोरीनीकरण): CH4 + Cl2 (सूर्य प्रकाश) → CH3Cl + HCl

4.4 एथनॉल और एथेनॉइक अम्ल

एथनॉल (C2H5OH) - गुण एवं अभिक्रियाएँ:

  • भौतिक गुण: रंगहीन द्रव, विशिष्ट गंध, जल में मिश्रणीय।
  • अभिक्रियाएँ:
    1. सोडियम के साथ: 2C2H5OH + 2Na → 2C2H5ONa + H2↑ (हाइड्रोजन गैस निकलती है)
    2. निर्जलीकरण: सांद्र H2SO4 की उपस्थिति में 443 K पर गर्म करने पर एथनॉल से जल निकलकर एथीन बनता है।
      C2H5OH → CH2=CH2 + H2O

एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) - गुण एवं अभिक्रियाएँ:

  • भौतिक गुण: तेज गंध वाला द्रव, 3-4% विलयन को सिरका कहते हैं।
  • अम्लीय गुण: यह एक दुर्बल कार्बनिक अम्ल है।
    • धातु कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट से अभिक्रिया कर CO2 गैस देता है।
      2CH3COOH + Na2CO3 → 2CH3COONa + H2O + CO2
    • क्षार के साथ उदासीनीकरण अभिक्रिया कर लवण बनाता है।
      CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O
  • एस्टरीकरण: एथेनॉइक अम्ल, एथनॉल के साथ सांद्र H2SO4 (उत्प्रेरक) की उपस्थिति में गर्म करने पर एक सुगंधित यौगिक एथिल एसीटेट (एस्टर) बनाता है।
    CH3COOH + C2H5OH → CH3COOC2H5 + H2O

4.5 साबुन और अपमार्जक

साबुन: लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों (वसा अम्ल) के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं।

सफाई की क्रियाविधि:

  1. साबुन के अणु के दो सिरे होते हैं: जलरागी (-COO-Na+, जल की ओर आकर्षित) और जलविरागी (हाइड्रोकार्बन पूँछ, तेल/ग्रीस की ओर आकर्षित)।
  2. जलविरागी सिरा तेल के कण में घुस जाता है, जलरागी सिरा बाहर पानी में रहता है।
  3. इससे एक गोलाकार संरचना बनती है जिसे मिसेल कहते हैं, जिसके केंद्र में तेल का कण होता है।
  4. मिसेल जल में कोलॉइड के रूप में बने रहते हैं और कपड़े या हाथ से धुलकर बह जाते हैं।

साबुन की सीमा: कठोर जल (Ca2+, Mg2+ आयन युक्त) में साबुन अघुलनशील अवक्षेप (स्कम) बनाता है, जिससे सफाई में रुकावट आती है और साबुन व्यर्थ होता है।

अपमार्जक (डिटर्जेंट): ये लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाले अमोनियम या सल्फोनेट लवण होते हैं। इनका आयनिक सिरा कठोर जल के आयनों के साथ अवक्षेप नहीं बनाता, इसलिए ये कठोर जल में भी प्रभावी होते हैं।

अध्याय के मुख्य सूत्र / सिद्धांत / नियम

  • कार्बन की संयोजकता: 4 (चतु:संयोजक)।
  • एल्केन का सामान्य सूत्र: CnH2n+2 (n ≥ 1)
  • एल्कीन का सामान्य सूत्र: CnH2n (n ≥ 2)
  • एल्काइन का सामान्य सूत्र: CnH2n-2 (n ≥ 2)
  • समजातीय श्रेणी में अंतर: प्रत्येक अगले सदस्य में -CH2- इकाई का अंतर।
  • दहन का सामान्य समीकरण: हाइड्रोकार्बन + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा
  • एस्टरीकरण अभिक्रिया: कार्बोक्सिलिक अम्ल + ऐल्कोहॉल → एस्टर + जल (अम्ल उत्प्रेरक)
  • क्षार द्वारा अपघटन (साबुनीकरण): वसा/तेल + NaOH → साबुन + ग्लिसरॉल

परीक्षा दृष्टि से अति महत्वपूर्ण (Exam Special)

ये वे विशिष्ट प्रश्न या टॉपिक हैं जो परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं। उनके संपूर्ण उत्तर यहाँ दिए गए हैं।

  1. टॉपिक/प्रश्न 1: सहसंयोजी आबंध और आयनिक आबंध में अंतर स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर:

    आधारसहसंयोजी आबंधआयनिक आबंध
    बनने की विधिइलेक्ट्रॉनों की साझेदारी सेइलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से
    बनाने वाले तत्वदोनों अधातुएँधातु और अधातु
    गलनांक/क्वथनांककमउच्च
    विद्युत चालकतागलित या विलयन अवस्था में सामान्यतः कुचालक (ग्रेफाइट को छोड़कर)गलित या विलयन अवस्था में सुचालक
    उदाहरणमेथेन (CH4), पानी (H2O)सोडियम क्लोराइड (NaCl), कैल्शियम ऑक्साइड (CaO)

  2. टॉपिक/प्रश्न 2: समजातीय श्रेणी क्या है? इसकी दो विशेषताएँ लिखिए। एल्केनों की समजातीय श्रेणी के प्रथम चार सदस्यों के नाम व सूत्र लिखिए।

    उत्तर: समजातीय श्रेणी एक ऐसे यौगिकों की श्रृंखला है जिसमें सभी सदस्यों में एक ही प्रकार्यात्मक समूह होता है, एक सामान्य सूत्र द्वारा व्यक्त किए जाते हैं और उनके भौतिक गुण उनके आणविक द्रव्यमान में वृद्धि के साथ क्रमशः परिवर्तित होते हैं, जबकि रासायनिक गुण समान होते हैं।
    विशेषताएँ:

    1. प्रत्येक अगले सदस्य में पिछले सदस्य की तुलना में -CH2- समूह का अंतर होता है।
    2. आणविक द्रव्यमान बढ़ने पर गलनांक व क्वथनांक बढ़ता है।
    एल्केनों के प्रथम चार सदस्य:
    1. मेथेन - CH4
    2. एथेन - C2H6
    3. प्रोपेन - C3H8
    4. ब्यूटेन - C4H10

  3. टॉपिक/प्रश्न 3: संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में रासायनिक अंतर समझाने के लिए एक परीक्षण बताइए।

    उत्तर: ब्रोमीन जल (लाल-भूरे रंग का) परीक्षण।

    • संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन): ये ब्रोमीन जल के साथ सामान्य परिस्थितियों में कोई अभिक्रिया नहीं करते। ब्रोमीन जल का रंग लाल-भूरा बना रहता है।
    • असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन/एल्काइन): ये ब्रोमीन जल से अभिक्रिया कर उसे विरंजित कर देते हैं (अर्थात रंगहीन बना देते हैं)। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ब्रोमीन का अणु (Br2) असंतृप्त यौगिक के द्वि/त्रि-आबंध में जुड़ जाता है, जिससे रंगीन Br2 समाप्त हो जाता है।

  4. टॉपिक/प्रश्न 4: एथनॉल को एथेनॉइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया क्यों कहते हैं? समीकरण दीजिए।

    उत्तर: क्योंकि इस अभिक्रिया में एथनॉल (C2H5OH) में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है (या हाइड्रोजन की मात्रा घटती है) और यह एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) में बदल जाता है। ऑक्सीकरण का अर्थ है किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की वृद्धि या हाइड्रोजन की कमी। यहाँ एथनॉल में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या 1 से बढ़कर 2 हो जाती है (अम्ल समूह -COOH में दो ऑक्सीजन होते हैं)।
    समीकरण: C2H5OH + 2[O] (ऑक्सीकारक KMnO4/K2Cr2O7 से) → CH3COOH + H2O

  5. टॉपिक/प्रश्न 5: साबुन की सफाई की क्रियाविधि चित्र सहित समझाइए।

    उत्तर: साबुन के अणु में एक जलरागी सिरा (-COO-Na+) और एक जलविरागी हाइड्रोकार्बन पूँछ होती है।

    1. जब साबुन को तेल या ग्रीस के दाग वाले कपड़े पर लगाया जाता है, तो साबुन का जलविरागी सिरा तेल के कणों की ओर आकर्षित होकर उनमें घुस जाता है।
    2. जलरागी सिरा पानी की ओर आकर्षित होता है और बाहर की तरफ रहता है।
    3. रगड़ने या हिलाने पर तेल का बड़ा कण टूटकर छोटे-छोटे कणों में बिखर जाता है।
    4. इस प्रकार साबुन के अणु तेल के इन छोटे कणों के चारों ओर एक गोलाकार संरचना बना लेते हैं, जिसे मिसेल कहते हैं। मिसेल के केंद्र में तेल का कण होता है और बाहरी सतह पर जलरागी सिरे।
    5. ये मिसेल जल में कोलॉइड के रूप में तैरते रहते हैं और कपड़े से अलग होकर पानी में बह जाते हैं, जिससे कपड़ा साफ हो जाता है।

संक्षिप्त सारांश (Quick Revision Notes)

कार्बन चतु:संयोजक होने और शृंखलन की अद्वितीय क्षमता के कारण लाखों यौगिक बनाता है। ये यौगिक सहसंयोजी आबंध द्वारा जुड़े होते हैं। हाइड्रोकार्बन संतृप्त (एल्केन) या असंतृप्त (एल्कीन, एल्काइन) हो सकते हैं। प्रकार्यात्मक समूह (जैसे -OH, -COOH) यौगिकों को विशिष्ट गुण देते हैं। समान प्रकार्यात्मक समूह वाले यौगिक समजातीय श्रेणी बनाते हैं। कार्बन यौगिक दहन, ऑक्सीकरण, संकलन और प्रतिस्थापन जैसी अभिक्रियाएँ करते हैं। एथनॉल और एथेनॉइक अम्ल दो महत्वपूर्ण यौगिक हैं। साबुन और डिटर्जेंट मिसेल बनाकर तेल को पानी में घोलने में मदद करते हैं, जिससे सफाई होती है।

परीक्षा में आने की अधिक संभावना वाले प्रमुख विषय:

    • कार्बन शृंखलन व चतु:संयोजकता के कारण असंख्य यौगिक बनाता है।
    • कार्बन यौगिकों में सहसंयोजक आबंध होते हैं।
    • हाइड्रोकार्बन: एल्केन (CnH2n+2), एल्कीन (CnH2n), एल्काइन (CnH2n-2).
    • प्रकार्यात्मक समूह यौगिक को विशिष्ट गुण देते हैं।
    • समजातीय श्रेणी में -CH2- का अंतर होता है।
    • महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ: दहन, ऑक्सीकरण, संकलन, प्रतिस्थापन।
    • एथनॉल और एथेनॉइक अम्ल दो महत्वपूर्ण यौगिक हैं।
    • साबुन मिसेल बनाकर सफाई करता है।

तैयारी टिप: सभी रासायनिक समीकरण, सामान्य सूत्र और प्रकार्यात्मक समूह याद करें। संरचनाएँ बनाने का अभ्यास करें।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Pages

SoraTemplates

Best Free and Premium Blogger Templates Provider.

Buy This Template