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21.12.25

Class 10 History Chapter 1 Notes in Hindi | यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय | Best Revision Notes

Padhein Class 10 History Chapter 1 Europe mein Rashtravad ka Uday ke Notes in Hindi. Is post mein paayein full summary, important questions aur NCERT solutions exams ke liye
यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय - कक्षा 10 इतिहास पूर्ण नोट्स

🌍 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय - पूर्ण विस्तृत नोट्स

📚 अध्याय का महत्व और परीक्षा में इसकी उपयोगिता

यह अध्याय कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान (इतिहास) की पाठ्यपुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। इस अध्याय को समझना हर छात्र के लिए आवश्यक है क्योंकि यह हमें आधुनिक विश्व की राजनीतिक व्यवस्था की नींव के बारे में बताता है। जब हम आज के समय में भारत, फ्रांस, जर्मनी, इटली जैसे देशों को देखते हैं, तो हमें यह समझना चाहिए कि ये राष्ट्र कैसे बने, इनकी राष्ट्रीय पहचान कैसे विकसित हुई और लोगों ने खुद को एक राष्ट्र का हिस्सा कैसे मानना शुरू किया।

परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है। CBSE और अन्य बोर्ड परीक्षाओं में इस अध्याय से प्रतिवर्ष 10-12 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के प्रश्न शामिल होते हैं:

  • बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ): 5-6 प्रश्न (प्रत्येक 1 अंक)
  • लघुत्तरात्मक प्रश्न: 3-4 प्रश्न (प्रत्येक 2-3 अंक)
  • दीर्घउत्तरात्मक प्रश्न: 1-2 प्रश्न (प्रत्येक 5 अंक)
  • स्रोत-आधारित प्रश्न: चित्र, भाषण अंश, मानचित्र पर आधारित प्रश्न

इस अध्याय को पढ़ने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि आप न केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि आपको वर्तमान विश्व की राजनीति को समझने में भी मदद मिलेगी। जब आप टीवी पर किसी देश के स्वतंत्रता दिवस के समारोह या राष्ट्रीय एकता के बारे में समाचार सुनेंगे, तो आपको पता होगा कि यह सब कहाँ से शुरू हुआ था। राष्ट्रवाद एक शक्तिशाली भावना है जिसने पूरे यूरोप का नक्शा बदल दिया और इस अध्याय के माध्यम से आप इस शक्ति को समझ सकते हैं।

🏛️ अध्याय परिचय: मूलभूत अवधारणाएँ और सीखने के उद्देश्य

अध्याय का नाम: "यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय"

अध्याय का सरल अर्थ: यह अध्याय हमें बताता है कि कैसे 19वीं सदी में यूरोप के विभिन्न देशों में राष्ट्रवाद की भावना पैदा हुई, कैसे यह भावना विकसित हुई और फैली, और कैसे इसने यूरोप के राजनीतिक मानचित्र को पूरी तरह से बदल दिया।

इस अध्याय में आप निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें सीखेंगे:

  1. राष्ट्र क्या है और लोग खुद को एक राष्ट्र का हिस्सा क्यों मानने लगे
  2. फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद के विचार को कैसे जन्म दिया
  3. नेपोलियन बोनापार्ट ने यूरोप में क्रांतिकारी विचारों को कैसे फैलाया
  4. 1815 का विएना समझौता और यूरोप में रूढ़िवाद की वापसी
  5. उदारवादी राष्ट्रवाद और 1830-1848 की क्रांतियाँ
  6. जर्मनी का एकीकरण कैसे हुआ
  7. इटली का एकीकरण कैसे हुआ
  8. राष्ट्रीय प्रतीकों (मारियाने और जर्मेनिया) का महत्व
  9. बाल्कन संकट और प्रथम विश्व युद्ध का संबंध

यह अध्याय सिर्फ इतिहास नहीं है, बल्कि एक ऐसी कहानी है जो हमें बताती है कि कैसे सामान्य लोगों की सोच ने पूरे महाद्वीप का नक्शा बदल दिया। जब आप इस अध्याय को पढ़ेंगे, तो आपको पता चलेगा कि राष्ट्रवाद सिर्फ एक भावना नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली ताकत है जिसने राजाओं को हटाया, नए देश बनाए और यूरोप को पूरी तरह बदल दिया।

📖 अध्याय का पूर्ण विस्तृत स्पष्टीकरण

1. राष्ट्र क्या है? - अर्नेस्ट रेनान का दार्शनिक दृष्टिकोण

राष्ट्रवाद को समझने से पहले हमें यह समझना होगा कि राष्ट्र आखिर है क्या? बहुत से लोग गलतफहमी में रहते हैं कि राष्ट्र बनता है एक ही भाषा बोलने वाले लोगों से, या एक ही धर्म मानने वालों से, या एक ही क्षेत्र में रहने वालों से। लेकिन फ्रांसीसी विचारक और दार्शनिक अर्नेस्ट रेनान ने 11 मार्च 1882 को पेरिस के सोरबोन विश्वविद्यालय में एक प्रसिद्ध व्याख्यान दिया था जिसका शीर्षक था "क्या है एक राष्ट्र?"।

अर्नेस्ट रेनान के अनुसार राष्ट्र की परिभाषा: रेनान ने बताया कि राष्ट्र का निर्माण निम्नलिखित तत्वों से होता है:

  • एक सामूहिक इच्छा से - जब लोग मिलकर एक साथ रहने की इच्छा रखते हैं
  • साझा गौरवशाली अतीत से - जब लोगों को अपने पूर्वजों की उपलब्धियों पर सामूहिक गर्व होता है
  • भविष्य में साथ मिलकर काम करने की इच्छा से - जब लोग यह संकल्प लेते हैं कि वे आगे भी एक साथ रहेंगे
  • बलिदान और त्याग की भावना से - जब लोग अपने राष्ट्र के लिए कुछ त्याग करने को तैयार रहते हैं

वास्तविक जीवन का उदाहरण: भारत को ही लें। भारत में सैकड़ों भाषाएँ बोली जाती हैं, कई अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं। फिर भी हम सभी स्वयं को भारतीय कहते हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि हम सभी में एक साझा इतिहास का गर्व है - हमारे स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियाँ हैं, और भविष्य में मिलकर भारत को विकसित करने की सामूहिक इच्छा है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण: अर्नेस्ट रेनान की राष्ट्र की परिभाषा अक्सर 2-3 अंकों के प्रश्न में पूछी जाती है। परीक्षा में लिखते समय याद रखें - रेनान ने राष्ट्र को भाषा, धर्म, नस्ल या क्षेत्र से नहीं, बल्कि सामूहिक इच्छा, साझा गौरवशाली अतीत और भविष्य में साथ काम करने की इच्छा से जोड़ा।

2. फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्रवाद का जन्म (1789)

फ्रांसीसी क्रांति को इतिहास में राष्ट्रवाद का जनक माना जाता है। 1789 से पहले फ्रांस पर राजा लुई सोलहवें का निरंकुश शासन था। लेकिन 1789 में हुई क्रांति ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से उलट दिया।

फ्रांसीसी क्रांति के राष्ट्रवादी उपाय:

  • सत्ता का हस्तांतरण: सत्ता राजा से फ्रांसीसी नागरिकों के पास आ गई
  • ट्राइकलर झंडा: नया तिरंगा झंडा अपनाया गया
  • ला मार्सेइए: राष्ट्रगान की रचना
  • राष्ट्रीय दिवस: 14 जुलाई को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाना शुरू किया
  • समान कानून: पूरे देश के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था
  • केंद्रीय प्रशासन: एक केंद्रीय सरकार का गठन

फ्रांस की क्रांति ने एक नया विचार दिया - "लोग ही राष्ट्र हैं और लोग ही सरकार चलाएँगे"। फ्रांस ने घोषणा की कि वह पूरे यूरोप के लोगों को निरंकुश शासकों से मुक्त कराएगा। फ्रांसीसी सेनाएँ हॉलैंड, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और इटली गईं और वहाँ राष्ट्रवाद के विचार फैलाए।

3. नेपोलियन बोनापार्ट और उसका प्रभाव (1799-1815)

नेपोलियन बोनापार्ट ने 1799 में फ्रांस की सत्ता संभाली। उसने खुद को 1804 में फ्रांस का सम्राट घोषित किया लेकिन फ्रांसीसी क्रांति के कई सुधारों को जारी रखा।

नेपोलियन कोड (1804): यह नेपोलियन द्वारा लागू की गई एक व्यापक नागरिक संहिता थी जिसने पहली बार कई आधुनिक कानूनी सिद्धांत स्थापित किए।

नेपोलियन कोड की विशेषताएँ:

  • जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों का उन्मूलन
  • संपत्ति के अधिकार की सुरक्षा
  • सामंती व्यवस्था और सर्फ़ प्रथा का अंत
  • धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी

नेपोलियन ने यूरोप के कई देशों पर विजय प्राप्त की। शुरू में लोगों ने उसका स्वागत किया क्योंकि उसने सामंती व्यवस्था खत्म की। लेकिन बाद में लोग नाराज हो गए क्योंकि:

  • भारी कर लगाए गए
  • जबरन सैन्य भर्ती की गई
  • फ्रांसीसी भाषा और संस्कृति को थोपा गया

4. 1815 का विएना समझौता - रूढ़िवाद की वापसी

नेपोलियन की हार के बाद यूरोप की मुख्य शक्तियाँ विएना शहर में एकत्र हुईं। इस सम्मेलन का उद्देश्य था यूरोप में फिर से पुरानी व्यवस्था लाना।

विएना समझौते के मुख्य निर्णय:

  • फ्रांस की सीमाओं को 1790 के स्तर तक सीमित करना
  • नेपोलियन द्वारा हटाए गए राजाओं को फिर से सत्ता में बिठाना
  • फ्रांस के आसपास मजबूत राज्यों का निर्माण करना
  • जर्मन राज्यों के संघ का विघटन
शक्ति मुख्य प्रतिनिधि प्रमुख उद्देश्य
ऑस्ट्रिया चांसलर मेटरनिख रूढ़िवाद की पुनर्स्थापना
ब्रिटेन लॉर्ड कैसलरे शक्ति संतुलन बनाए रखना
रूस ज़ार अलेक्जेंडर प्रथम रूसी प्रभाव बढ़ाना
प्रशिया राजा फ्रेडरिक विलियम तृतीय जर्मन राज्यों में प्रभुत्व

विएना समझौते के बाद यूरोप में रूढ़िवाद का दौर शुरू हुआ। रूढ़िवादी लोग परंपरागत संस्थाओं को बनाए रखना चाहते थे। उन्होंने:

  • प्रेस पर सेंसरशिप लगाई
  • राजनीतिक विरोध का दमन किया
  • क्रांतिकारी विचारों का दमन किया

5. उदारवादी राष्ट्रवाद (1830-1848)

उदारवाद की परिभाषा: उदारवाद एक राजनीतिक और आर्थिक विचारधारा है जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता, लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों, संवैधानिक सरकार और निजी संपत्ति के अधिकार पर बल देती है।

19वीं सदी की शुरुआत में, यूरोप में मध्यम वर्ग ने उदारवादी राष्ट्रवाद का समर्थन किया। उनकी मुख्य माँगें थीं:

  • संविधान और संसदीय सरकार
  • प्रेस की स्वतंत्रता
  • कानून के समक्ष समानता
  • निजी संपत्ति का अधिकार
  • आर्थिक स्वतंत्रता
  • धार्मिक सहिष्णुता
  • राष्ट्रीय एकीकरण

हालाँकि, यह उदारवाद सभी के लिए नहीं था। यह एक "सीमित उदारवाद" था क्योंकि:

  • महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं था
  • संपत्तिहीन पुरुषों को मतदान का अधिकार नहीं था
  • मतदान का अधिकार संपत्ति के आधार पर तय होता था

6. 1830 और 1848 की क्रांतियाँ

1830 की जुलाई क्रांति (फ्रांस): फ्रांस में बूर्बों राजवंश के राजा चार्ल्स X को हटाकर लुई फिलिप को संवैधानिक राजा बनाया गया।

1848 की क्रांतियाँ: पूरे यूरोप में हुईं। इसके मुख्य कारण थे:

  • खाद्य संकट (1845-46 में आलू की फसल खराब)
  • बेरोजगारी
  • मध्यम वर्ग की राजनीतिक माँगें
  • राष्ट्रीय एकीकरण की इच्छा

फ्रांस में 1848 की क्रांति के बाद महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए:

  • सार्वभौमिक पुरुष मताधिकार लागू हुआ
  • राष्ट्रीय कार्यशालाएँ स्थापित की गईं
  • कार्य का अधिकार संविधान में शामिल किया गया

7. जर्मनी का एकीकरण (1866-1871)

1815 से पहले जर्मनी 39 छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था। प्रशिया के चांसलर ऑटो वॉन बिस्मार्क ने "लोहे और रक्त" की नीति अपनाकर जर्मनी को एक किया।

बिस्मार्क की 'लोहे और रक्त' नीति: बिस्मार्क ने स्पष्ट किया कि जर्मनी का एकीकरण भाषणों और वोटों से नहीं, बल्कि लोहे (सेना) और रक्त (युद्ध) से होगा।

वर्ष युद्ध विरुद्ध परिणाम
1864 डेनिश युद्ध डेनमार्क प्रशिया की जीत
1866 सप्ताहीय युद्ध ऑस्ट्रिया ऑस्ट्रिया की हार
1870-71 फ्रांस-प्रशिया युद्ध फ्रांस फ्रांस की हार

18 जनवरी 1871: फ्रांस के वर्साय महल में एक भव्य समारोह हुआ। प्रशिया के राजा विल्हेम प्रथम को जर्मन साम्राज्य का सम्राट घोषित किया गया। इस प्रकार जर्मनी का एकीकरण पूरा हुआ।

परीक्षा के लिए विशेष: जर्मनी के एकीकरण पर अक्सर 5 अंकों का प्रश्न पूछा जाता है। बिस्मार्क की भूमिका, तीन युद्धों के नाम और तिथियाँ, और वर्साय में समारोह - ये सभी बिंदु याद रखें।

8. इटली का एकीकरण (1859-1870)

इटली भी कई राज्यों में बँटा था। एकीकरण में तीन मुख्य नेताओं ने भूमिका निभाई:

इटली के एकीकरण के तीन स्तंभ:

  • ज्यूसेपे मेत्सिनी: क्रांतिकारी विचारक
  • काउंट कैवूर: सर्डिनिया-पीडमॉन्ट के प्रधानमंत्री
  • ज्यूसेपे गैरीबाल्डी: सैन्य नेता

इटली के एकीकरण की प्रमुख घटनाएँ:

  • 1859: ऑस्ट्रिया के विरुद्ध युद्ध
  • 1860: गैरीबाल्डी का 'हजारों का अभियान'
  • 1861: इटली के राज्य की घोषणा
  • 1866: वेनिस इटली में मिल गया
  • 1870: रोम इटली में मिल गया

इस प्रकार 1870 तक इटली का एकीकरण पूरा हो गया। रोम राजधानी बना और विक्टर इमैनुएल द्वितीय पूरे इटली के राजा बने।

9. राष्ट्रीय प्रतीक: मारियाने और जर्मेनिया

कलाकारों और लेखकों ने राष्ट्रीय भावनाओं को जगाने के लिए राष्ट्रों को महिला रूपकों के रूप में चित्रित किया।

मारियाने (फ्रांस): फ्रांसीसी गणराज्य की प्रतीकात्मक महिला छवि जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों को दर्शाती है।

मारियाने की पहचान:

  • लाल टोपी (स्वतंत्रता का प्रतीक)
  • तिरंगा झंडा
  • कुल्हाड़ी (निरंकुशता के विनाश का प्रतीक)
  • मूर्तियाँ सार्वजनिक स्थानों पर लगाई गईं
  • छवि सिक्कों और डाक टिकटों पर छपी

जर्मेनिया (जर्मनी): जर्मन राष्ट्र की प्रतीकात्मक महिला छवि जो बल, वीरता और एकता का प्रतिनिधित्व करती है।

जर्मेनिया की पहचान:

  • ओक के पत्तों का मुकुट (साहस का प्रतीक)
  • तलवार (शक्ति का प्रतीक)
  • काली-लाल-सुनहरी पोशाक (जर्मन रंग)
  • बलूत का पेड़ (वीरता का प्रतीक)
  • जैतून की टहनी (शांति की इच्छा)

10. बाल्कन संकट और प्रथम विश्व युद्ध

बाल्कन संकट: दक्षिण-पूर्व यूरोप के बाल्कन प्रायद्वीप में उत्पन्न राजनीतिक तनाव जो विभिन्न जातीय राष्ट्रवादी आंदोलनों के कारण उत्पन्न हुआ।

बाल्कन संकट के मुख्य कारण:

  • ऑटोमन साम्राज्य का पतन
  • विभिन्न जातीय समूहों की स्वतंत्रता की माँग
  • यूरोपीय शक्तियों का हस्तक्षेप
  • राष्ट्रवाद का आक्रामक रूप

बाल्कन संकट कैसे प्रथम विश्व युद्ध का कारण बना?

  • 28 जून 1914: ऑस्ट्रिया के राजकुमार फ्रांज फर्डिनेंड की हत्या
  • ऑस्ट्रिया ने सर्बिया पर युद्ध की घोषणा की
  • रूस ने सर्बिया का समर्थन किया
  • जर्मनी ने ऑस्ट्रिया का समर्थन किया
  • फ्रांस और ब्रिटेन भी युद्ध में कूद पड़े
  • इस प्रकार एक स्थानीय घटना विश्वयुद्ध में बदल गई

🌟 अध्याय के मुख्य बिंदु

  • फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद को जन्म दिया
  • नेपोलियन ने यूरोप में क्रांतिकारी विचार फैलाए
  • 1815 का विएना समझौता रूढ़िवादी शक्तियों की जीत था
  • 1848 की क्रांतियाँ जन आंदोलनों का परिणाम थीं
  • जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क की 'लोहे और रक्त' नीति से हुआ
  • इटली का एकीकरण मेत्सिनी, कैवूर और गैरीबाल्डी के प्रयासों से हुआ
  • मारियाने और जर्मेनिया राष्ट्रीय प्रतीक थे
  • बाल्कन संकट ने प्रथम विश्व युद्ध को जन्म दिया
  • राष्ट्रवाद ने यूरोप का राजनीतिक मानचित्र बदल दिया
  • संस्कृति और कला ने राष्ट्रीय भावना को मजबूत किया

📝 परीक्षा के लिए विशेष नोट्स

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) के लिए:

  • फ्रांसीसी क्रांति - 1789
  • नेपोलियन कोड - 1804
  • विएना समझौता - 1815
  • जर्मनी का एकीकरण - 1871
  • इटली का एकीकरण - 1870
  • 'लोहे और रक्त' नीति - बिस्मार्क
  • 'यंग इटली' - मेत्सिनी
  • प्रथम विश्व युद्ध - 1914

लघुत्तरात्मक प्रश्न (3 अंक) के लिए:

  • अर्नेस्ट रेनान की राष्ट्र की परिभाषा
  • फ्रांसीसी क्रांति के तीन राष्ट्रवादी उपाय
  • नेपोलियन कोड की तीन विशेषताएँ
  • विएना समझौते के दो उद्देश्य
  • उदारवाद की परिभाषा और दो विशेषताएँ
  • 1848 की क्रांतियों के दो कारण
  • मारियाने और जर्मेनिया कौन थीं?
  • बाल्कन संकट के दो कारण

दीर्घउत्तरात्मक प्रश्न (5 अंक) के लिए:

  • जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका
  • इटली के एकीकरण में विभिन्न नेताओं के योगदान
  • फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद को कैसे प्रभावित किया?
  • बाल्कन संकट प्रथम विश्व युद्ध का कारण कैसे बना?
  • राष्ट्रीय प्रतीकों (मारियाने और जर्मेनिया) का महत्व

📋 अध्याय सारांश और परीक्षा विषय

संक्षिप्त सारांश: 19वीं सदी में यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय हुआ जिसकी शुरुआत फ्रांसीसी क्रांति (1789) से हुई। नेपोलियन ने यूरोप में क्रांतिकारी विचार फैलाए। 1815 के विएना समझौते ने रूढ़िवादी व्यवस्था स्थापित की। 1830 और 1848 की क्रांतियों ने उदारवादी आंदोलनों को बल दिया। जर्मनी (1871) और इटली (1870) का एकीकरण हुआ। राष्ट्रीय प्रतीकों ने राष्ट्रीय भावना को मजबूत किया। बाल्कन संकट ने प्रथम विश्व युद्ध (1914) को जन्म दिया।

परीक्षा में आने वाले प्रमुख विषय:

  1. राष्ट्र और राष्ट्रवाद की अवधारणा
  2. फ्रांसीसी क्रांति का राष्ट्रवाद पर प्रभाव
  3. नेपोलियन के सुधार और उनकी सीमाएँ
  4. विएना समझौता और यूरोप में रूढ़िवाद
  5. 1830 और 1848 की क्रांतियों का महत्व
  6. जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया
  7. इटली के एकीकरण में विभिन्न नेताओं की भूमिका
  8. राष्ट्रीय प्रतीकों का महत्व
  9. बाल्कन संकट और प्रथम विश्व युद्ध
  10. संस्कृति और कला की राष्ट्रवाद में भूमिका

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (10 Q&A)

प्रश्न 1: राष्ट्रवाद क्या है? इसकी दो विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: राष्ट्रवाद वह भावना है जिसमें लोग स्वयं को एक सामूहिक पहचान से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। विशेषताएँ: (1) साझा इतिहास, संस्कृति और भाषा की भावना (2) एक सामूहिक राजनीतिक लक्ष्य की प्राप्ति की इच्छा।

प्रश्न 2: फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद के विकास में क्या योगदान दिया?

उत्तर: फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद को जन्म दिया: (1) सत्ता राजा से नागरिकों को हस्तांतरित हुई (2) राष्ट्रीय प्रतीक (झंडा, गान, त्योहार) बने (3) समान कानून और केंद्रीय प्रशासन स्थापित हुआ (4) फ्रांस ने स्वयं को यूरोप के लोगों का मुक्तिदाता घोषित किया।

प्रश्न 3: नेपोलियन कोड क्या था? इसकी तीन विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: नेपोलियन कोड (1804) फ्रांसीसी नागरिक संहिता थी। विशेषताएँ: (1) जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त (2) संपत्ति के अधिकार की सुरक्षा (3) धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी (4) सामंतवाद और सर्फ़ प्रथा का अंत।

प्रश्न 4: 1815 के विएना समझौते के उद्देश्य क्या थे?

उत्तर: विएना समझौते के उद्देश्य: (1) नेपोलियन युग के परिवर्तनों को पलटना (2) यूरोप में रूढ़िवादी व्यवस्था स्थापित करना (3) फ्रांस की शक्ति को सीमित करना (4) यूरोपीय राजतंत्रों की पुनर्स्थापना करना (5) क्रांतिकारी विचारों का दमन करना।

प्रश्न 5: 1848 की क्रांतियों के क्या कारण थे?

उत्तर: 1848 की क्रांतियों के कारण: (1) खाद्य संकट - 1845-46 में आलू की फसल खराब होने से भुखमरी फैली (2) बेरोजगारी (3) मध्यम वर्ग की राजनीतिक माँगें (4) राष्ट्रीय एकीकरण की इच्छा (जर्मनी, इटली में) (5) आर्थिक मंदी।

प्रश्न 6: जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तर: बिस्मार्क ने जर्मनी के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई: (1) "लोहे और रक्त" की नीति अपनाई (2) तीन युद्ध लड़े - 1864 में डेनमार्क के विरुद्ध, 1866 में ऑस्ट्रिया के विरुद्ध, 1870-71 में फ्रांस के विरुद्ध (3) प्रशिया की सेना को मजबूत किया (4) 18 जनवरी 1871 को वर्साय में जर्मन साम्राज्य की स्थापना की।

प्रश्न 7: इटली के एकीकरण में गैरीबाल्डी का क्या योगदान था?

उत्तर: गैरीबाल्डी का योगदान: (1) "रेड शर्ट्स" सेना बनाई (2) 1860 में "हजारों का अभियान" चलाया (3) सिसिली और नेपल्स पर विजय प्राप्त की (4) विजित प्रदेशों को सर्डिनिया-पीडमॉन्ट को सौंप दिया (5) सैन्य कौशल से इटली के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 8: मारियाने और जर्मेनिया कौन थीं? इनका क्या महत्व था?

उत्तर: मारियाने फ्रांस की और जर्मेनिया जर्मनी की प्रतीकात्मक महिला छवियाँ थीं। महत्व: (1) राष्ट्रीय एकता का प्रतीक (2) लोगों में राष्ट्रीय भावना जगाने का साधन (3) सिक्कों, डाक टिकटों पर इनका उपयोग हुआ (4) राष्ट्रीय गौरव और विरासत का प्रतिनिधित्व।

प्रश्न 9: बाल्कन संकट क्या था? यह प्रथम विश्व युद्ध का कारण कैसे बना?

उत्तर: बाल्कन संकट दक्षिण-पूर्व यूरोप में राष्ट्रवादी संघर्ष था। यह युद्ध का कारण बना: (1) विभिन्न जातीय समूह स्वतंत्रता चाहते थे (2) यूरोपीय शक्तियाँ इस क्षेत्र पर नियंत्रण चाहती थीं (3) 28 जून 1914 को ऑस्ट्रियाई राजकुमार फ्रांज फर्डिनेंड की हत्या हुई (4) ऑस्ट्रिया ने सर्बिया पर युद्ध की घोषणा की (5) गठबंधन प्रणाली के कारण पूरा यूरोप युद्ध में कूद पड़ा।

प्रश्न 10: 19वीं सदी में यूरोप के मानचित्र पर राष्ट्रवाद ने क्या प्रभाव डाला?

उत्तर: राष्ट्रवाद ने 19वीं सदी में यूरोप के मानचित्र को बदल दिया: (1) बहुराष्ट्रीय साम्राज्य टूटे (2) जर्मनी और इटली जैसे नए राष्ट्र-राज्य बने (3) छोटे राज्यों का विलय होकर बड़े राष्ट्र बने (4) राष्ट्र-राज्य की अवधारणा स्थापित हुई (5) अंततः राष्ट्रवाद के आक्रामक रूप ने बाल्कन संकट और प्रथम विश्व युद्ध को जन्म दिया।

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